भारत की संस्कृति में नदियों का संगम सिर्फ भौगोलिक घटना नहीं है, बल्कि आस्था, परंपरा और जीवन-दर्शन का गहरा प्रतीक भी है। जहाँ दो नदियाँ मिलती हैं, वहाँ ऊर्जा का एक अलग ही अनुभव होता है। ऐसे ही पवित्र संगम स्थलों को हमारे शास्त्रों में “प्रयाग” कहा गया है। बहुत लोग सिर्फ प्रयागराज को ही प्रयाग समझते हैं, लेकिन असल में “14 प्रयाग के नाम” की एक व्यापक परंपरा है, जिसमें उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र से लेकर प्रयागराज तक कई संगम शामिल हैं।
इन प्रयागों में कुछ बेहद प्रसिद्ध हैं जैसे देवप्रयाग, रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग, नंदप्रयाग, विष्णुप्रयाग और प्रयागराज। वहीं कुछ अन्य प्रयाग कम चर्चित हैं लेकिन उनके धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व कम नहीं। इस लेख में आप 14 प्रयाग के नाम, उनके स्थान, कौन-कौन सी नदियाँ वहाँ मिलती हैं, और वहाँ जाने के काम के टिप्स सबकुछ साफ, सरल भाषा में जानेंगे।
प्रयाग का अर्थ क्या होता है?
प्रयाग का सीधा अर्थ है मिलन स्थल, यानी जहाँ दो (या तीन) पवित्र नदियाँ मिलती हैं। हिंदू परंपरा में इसे बहुत शुभ माना गया है, क्योंकि संगम को शुद्धि, स्नान, पितृ-तर्पण, पूजा और साधना के लिए श्रेष्ठ स्थान माना गया है।
प्रयाग क्यों महत्वपूर्ण हैं?
- यह नदियों के मिलन का स्थान होता है, जिसे धार्मिक रूप से पुण्यदायी माना जाता है
- कई प्रयाग तीर्थ यात्रा और चारधाम मार्ग पर आते हैं
- प्रयाग स्थल अक्सर मंदिरों, आश्रमों और प्राचीन कथाओं से जुड़े होते हैं
पंचप्रयाग – उत्तराखंड के 5 मुख्य प्रयाग
उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में अलकनंदा नदी के साथ जुड़ी संगम परंपरा को पंचप्रयाग कहा जाता है। पंचप्रयाग यात्रा का महत्व बहुत बड़ा है, खासकर बद्रीनाथ यात्रा मार्ग पर।
1) विष्णुप्रयाग – अलकनंदा और धौलीगंगा का संगम

विष्णुप्रयाग का नाम भगवान विष्णु से जुड़ा है। यह प्रयाग जोशीमठ के पास पड़ता है और बद्रीनाथ मार्ग पर बेहद महत्वपूर्ण पड़ाव है।
- संगम: अलकनंदा + धौलीगंगा
- स्थान: जोशीमठ के पास, चमोली (उत्तराखंड)
काम की बात: यहाँ पानी का रंग अक्सर अलग-अलग दिखता है, जो संगम की पहचान बनता है।
2) नंदप्रयाग – अलकनंदा और नंदाकिनी का संगम
नंदप्रयाग अपेक्षाकृत शांत और कम भीड़ वाला प्रयाग है। यह जगह प्रकृति और पहाड़ों के बीच बहुत सुंदर लगती है।
संगम: अलकनंदा + नंदाकिनी (कुछ जगह इसे मंदाकिनी/नंदाकिनी संदर्भ में बताया जाता है)
स्थान: चमोली (उत्तराखंड)
एक्शन टिप: यहाँ रुककर स्थानीय पहाड़ी भोजन जरूर ट्राई करें।
3) कर्णप्रयाग – अलकनंदा और पिंडर का संगम
यह प्रयाग महाभारत काल के दानवीर कर्ण से जोड़ा जाता है। यह जगह धार्मिक के साथ-साथ ऐतिहासिक महत्व भी रखती है।
संगम: अलकनंदा + पिंडर
स्थान: कर्णप्रयाग, चमोली
एक्शन टिप: संगम के आसपास सुबह का समय शांत रहता है, दर्शन-स्नान के लिए बढ़िया होता है।
4) रुद्रप्रयाग – अलकनंदा और मंदाकिनी का संगम
रुद्रप्रयाग का संबंध भगवान शिव के रुद्र रूप से माना जाता है। यह केदारनाथ यात्रा मार्ग का बड़ा केंद्र है।
संगम: अलकनंदा + मंदाकिनी
स्थान: रुद्रप्रयाग जिला
काम की बात: यह जगह यात्रियों के लिए बेस पॉइंट की तरह होती है, इसलिए यहाँ सुविधाएँ अच्छी मिल जाती हैं।
5) देवप्रयाग – अलकनंदा और भागीरथी का संगम (यहाँ से गंगा)
देवप्रयाग पंचप्रयाग में सबसे विशेष माना जाता है, क्योंकि यहाँ अलकनंदा और भागीरथी के मिलने के बाद नदी को गंगा कहा जाता है।
संगम: अलकनंदा + भागीरथी
स्थान: टिहरी गढ़वाल
एक्शन टिप: देवप्रयाग का संगम दृश्य बहुत सुंदर है, यहाँ से सुबह-सुबह फोटो भी शानदार आती है।
अन्य 9 प्रयाग – 14 प्रयाग के नाम में शामिल महत्वपूर्ण संगम
अब आते हैं वे प्रयाग जो पंचप्रयाग में नहीं आते, लेकिन 14 प्रयाग के नाम की सूची में बहुत अहम हैं।
6) प्रयागराज (इलाहाबाद) – गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम
यह भारत का सबसे प्रसिद्ध प्रयाग है जिसे तीर्थराज कहा जाता है। यहाँ गंगा और यमुना का संगम स्पष्ट दिखता है, और मान्यता है कि सरस्वती नदी अदृश्य रूप से यहीं मिलती है।
संगम: गंगा + यमुना + सरस्वती (अदृश्य)
स्थान: उत्तर प्रदेश
एक्शन टिप: यदि आप कुंभ या माघ मेले में जा रहे हैं, तो भीड़ और सुरक्षा को लेकर पहले से योजना बनाएं।
7) केशवप्रयाग – अलकनंदा और सरस्वती का संगम
केशवप्रयाग बद्रीनाथ के पास माना जाता है और भगवान विष्णु (केशव) के नाम से जुड़ा है।
संगम: अलकनंदा + सरस्वती
स्थान: बद्रीनाथ के पास
एक्शन टिप: बद्रीनाथ दर्शन के साथ इस स्थान को जोड़ना आसान रहता है।
8) सोनप्रयाग – मंदाकिनी और बासुकी का संगम
सोनप्रयाग केदारनाथ यात्रा में एक अहम पड़ाव है। यहाँ यात्रियों की अच्छी आवाजाही रहती है।
संगम: मंदाकिनी + बासुकी
स्थान: केदारनाथ मार्ग
काम की बात: यात्रा में ठंड और बारिश का ध्यान रखें, रेनकोट जरूर रखें।
9) गणेशप्रयाग – भागीरथी और भिलंगना का संगम
यह प्रयाग पुरानी टिहरी के क्षेत्र में था और टिहरी बांध के बनने के बाद यह क्षेत्र काफी बदल गया।
संगम: भागीरथी + भिलंगना
स्थान: पुरानी टिहरी (ऐतिहासिक संदर्भ)
एक्शन टिप: यदि आप टिहरी घूम रहे हैं, तो स्थानीय इतिहास पूछना रोचक रहता है।
10) सूर्यप्रयाग – मंदाकिनी और लस्तर नदी का संगम
यह प्रयाग कम जाना जाता है, लेकिन 14 प्रयाग के नाम में इसका उल्लेख विशेष रूप से मिलता है।
संगम: मंदाकिनी + लस्तर
काम की बात: यह प्रयाग प्रकृति प्रेमियों के लिए अच्छा अनुभव दे सकता है।
11) इन्द्रप्रयाग – नयार और गंगा का संगम
इन्द्रप्रयाग का नाम इन्द्र देव से जोड़ा जाता है। यह भी एक पवित्र संगम है।
संगम: नयार + गंगा
स्थान: व्यासघाट क्षेत्र
एक्शन टिप: यहाँ कम भीड़ रहती है, शांत संगम अनुभव चाहें तो यह अच्छा विकल्प है।
12) श्यामप्रयाग – पिंडर और आटागाड़ नदी का संगम
यह प्रयाग स्थानीय श्रद्धा में बहुत मान्य है।
संगम: पिंडर + आटागाड़
काम की बात: ऐसे स्थानों पर स्थानीय लोगों से जानकारी लेने पर ज्यादा सही मार्गदर्शन मिल जाता है।
13) सोमप्रयाग – मंदाकिनी और सोंग नदी का संगम
सोमप्रयाग का संबंध चंद्र देव (सोम) से माना जाता है।
संगम: मंदाकिनी + सोंग
एक्शन टिप: यहाँ सुबह-शाम का समय धार्मिक दृष्टि से अच्छा माना जाता है।
14) जगदिशप्रयाग – मंदाकिनी और कालीगंगा का संगम
यह प्रयाग भगवान जगदीश (विष्णु स्वरूप) से जुड़ा माना जाता है।
संगम: मंदाकिनी + कालीगंगा
काम की बात: यात्रा पर निकलते समय नेटवर्क/सिग्नल की तैयारी रखें क्योंकि पहाड़ों में दिक्कत हो सकती है।
14 प्रयाग के नाम – पूरी सूची एक साथ (क्विक लिस्ट)
यदि आप जल्दी से सूची देखना चाहते हैं, तो यह रहा पूरा सार:
देवप्रयाग – अलकनंदा + भागीरथी
रुद्रप्रयाग – अलकनंदा + मंदाकिनी
कर्णप्रयाग – अलकनंदा + पिंडर
नंदप्रयाग – अलकनंदा + नंदाकिनी
विष्णुप्रयाग – अलकनंदा + धौलीगंगा
प्रयागराज – गंगा + यमुना + सरस्वती
केशवप्रयाग – अलकनंदा + सरस्वती
सोनप्रयाग – मंदाकिनी + बासुकी
गणेशप्रयाग – भागीरथी + भिलंगना
सूर्यप्रयाग – मंदाकिनी + लस्तर
इन्द्रप्रयाग – नयार + गंगा
श्यामप्रयाग – पिंडर + आटागाड़
सोमप्रयाग – मंदाकिनी + सोंग
जगदिशप्रयाग – मंदाकिनी + कालीगंगा
14 प्रयाग की यात्रा कैसे प्लान करें?
अगर आप 14 प्रयाग के नाम पर आधारित यात्रा करना चाहते हैं, तो यह सरल तरीका अपनाएं:
पहले उत्तराखंड के पंचप्रयाग (विष्णुप्रयाग से देवप्रयाग) करें
फिर केदारनाथ मार्ग के संगम (सोनप्रयाग आदि) जोड़ें
अंत में प्रयागराज संगम को यात्रा का अंतिम पड़ाव रखें
यात्रा के लिए जरूरी बातें:
मौसम का ध्यान रखें (विशेषकर मानसून में)
ऊनी कपड़े, दवा और रेनकोट साथ रखें
स्थानीय मार्गदर्शन लें, क्योंकि कई प्रयाग छोटे स्थानों पर हैं
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. 14 प्रयाग क्या होते हैं?
14 प्रयाग वे पवित्र संगम स्थल हैं जहाँ दो या तीन नदियाँ मिलती हैं और जिन्हें धार्मिक रूप से बहुत शुभ माना जाता है।
Q2. पंचप्रयाग और 14 प्रयाग में क्या अंतर है?
पंचप्रयाग सिर्फ उत्तराखंड के 5 मुख्य संगम हैं, जबकि 14 प्रयाग में अन्य संगम भी शामिल होते हैं, जैसे प्रयागराज, सोनप्रयाग आदि।
Q3. देवप्रयाग इतना प्रसिद्ध क्यों है?
क्योंकि देवप्रयाग में अलकनंदा और भागीरथी मिलती हैं और यहीं से नदी को गंगा कहा जाता है।
Q4. प्रयागराज को तीर्थराज क्यों कहा जाता है?
यहाँ गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम माना जाता है, इसलिए इसे तीर्थों में सबसे श्रेष्ठ यानी तीर्थराज कहा जाता है।
Q5. क्या 14 प्रयाग की यात्रा एक साथ हो सकती है?
हाँ, लेकिन इसके लिए समय, मौसम और रूट प्लानिंग जरूरी है। अधिकतर यात्री पहले उत्तराखंड और बाद में प्रयागराज कवर करते हैं।
निष्कर्ष
14 प्रयाग के नाम सिर्फ संगम स्थलों की सूची नहीं हैं, बल्कि ये भारत की नदी संस्कृति, आस्था और भूगोल का जीवंत परिचय हैं। पंचप्रयाग से लेकर प्रयागराज तक हर प्रयाग की अपनी कहानी, अपनी पहचान और अपनी धार्मिक ऊर्जा है। अगर आप उत्तराखंड या प्रयागराज यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो इन प्रयागों के बारे में जानना आपकी यात्रा को और भी अर्थपूर्ण बना देगा।
अगर आपको चाहें तो मैं 14 प्रयाग के नाम पर एक अलग लेख “यात्रा रूट और मैप गाइड” स्टाइल में भी लिख सकता हूँ, जो टूरिस्ट के लिए और भी उपयोगी रहेगा।

Maharshi Kushwaha is the founder of Prayagraj Portal, a digital platform dedicated to providing accurate news, city updates, culture, education, tourism, jobs, events, and essential services related to Prayagraj (Allahabad). Though he is not originally from Prayagraj, he frequently visits the city and works closely with a strong local team to ensure authentic and responsible reporting. A passionate digital creator and youth entrepreneur, he focuses on building meaningful platforms that promote information access, youth engagement, and community development. His vision is to make Prayagraj Portal one of the most trusted and impactful digital sources for everything related to Prayagraj.




